प्रधानमंत्री आवास एवं मनरेगा घोटाले का खुलासा, शंकरगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई

फर्जी जियो टैगिंग, मास्टर रोल और खातों में हेराफेरी कर लाखों की राशि का गबन, शंकरगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई

शंकरगढ़/(शोएब सिद्दिकी) जिला बलरामपुर-रामानुजगंज के थाना शंकरगढ़ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत हरिगवां में प्रधानमंत्री आवास योजना एवं मनरेगा के क्रियान्वयन में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। विस्तृत जांच के बाद अनियमितता पाए जाने पर पंचायत सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायक के विरुद्ध थाना शंकरगढ़ में अपराध क्रमांक 37/2026, धारा 316(5), 318(2,4), 338, 336(3), 340(2), 3(5) BNS के तहत एफआईआर दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

गिरफ्तार आरोपी:
जान टोप्पो पिता स्वर्गीय जयदान टोप्पो, उम्र 39 वर्ष, निवासी ग्राम अमेरा, थाना शंकरगढ़

संजय दास पिता परशुराम, उम्र 40 वर्ष, निवासी मनकेपी, थाना शंकरगढ़

मामले का पूरा विवरण:
जनपद पंचायत शंकरगढ़ के सीईओ वेदप्रकाश पांडे द्वारा थाना शंकरगढ़ में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि ग्राम पंचायत हरिगवां के पंचायत सचिव जॉन कुमार टोप्पो एवं ग्राम रोजगार सहायक संजय दास द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों के आवासों का फर्जी जियो टैगिंग किया गया। अपूर्ण मकानों को पूर्ण दिखाकर उनके खातों में राशि अंतरित कराई गई और हितग्राहियों से अंगूठा लगवाकर उक्त राशि का गबन किया गया।

इसके अतिरिक्त, मनरेगा योजना के तहत फर्जी मास्टर रोल तैयार कर मजदूरी की राशि विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर वित्तीय अनियमितता की गई।
जनपद सीईओ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत हरिगवां में 26 प्रधानमंत्री आवास पूर्ण एवं 47 आवास प्रगतिरत बताए गए, जबकि वास्तविकता में कई आवास भौतिक रूप से अपूर्ण थे। रोजगार सहायक द्वारा ऐसे अपूर्ण आवासों को फर्जी तरीके से पूर्ण दिखाकर जियो टैग किया गया।

इस प्रकार पंचायत सचिव एवं रोजगार सहायक द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के 7 हितग्राहियों के खातों से 9,05,000 रुपए तथा मनरेगा मजदूरी मद से 1,00,881 रुपए, कुल 10,05,881 रुपए की राशि का गबन किया गया।
हितग्राहियों से जुड़ी गड़बड़ियां:
ग्राम पंचायत हरिगवां के विस्टा पैकरा और बिस्टा पैकरा एक ही व्यक्ति हैं, लेकिन ग्राम सभा प्रस्ताव एवं आवास प्लस सूची में अलग-अलग नाम दर्शाकर आवास स्वीकृत कराया गया। आवास अप्रारंभ होने के बावजूद 2,40,000 रुपए तथा मनरेगा से 33,894 रुपए का भुगतान किया गया।

मुन्ना पत्नी शांति के नाम आवास स्वीकृत किया गया, जो वर्तमान में अप्रारंभ है, फिर भी 1,20,000 रुपए जारी किए गए, जबकि मुन्ना के नाम पहले से ही आवास पूर्ण स्वीकृत था।
मंगरू पिता शिवनाथ एवं मुन्नी (पति-पत्नी) के मामले में मंगरू का आवास टॉप लेवल तक प्रगतिरत है, जबकि मुन्नी के नाम आवास अप्रारंभ होने के बावजूद 1,20,000 रुपए एवं मनरेगा से 20,358 रुपए का भुगतान किया गया।

बीजू पिता टेडगु के नाम स्वीकृत आवास अप्रारंभ होने के बावजूद 1,20,000 रुपए एवं मनरेगा से 21,942 रुपए का भुगतान किया गया।

जुगना पिता तेतरा के नाम स्वीकृत आवास अप्रारंभ होने के बावजूद 1,20,000 रुपए एवं मनरेगा से 24,687 रुपए का भुगतान किया गया।

निशांत कुमार एक्का पिता अमृत के नाम स्वीकृत आवास अप्रारंभ होने के बावजूद 95,000 रुपए जारी किए गए, जिसमें से 40,000 रुपए रोजगार सहायक द्वारा ओटीपी के माध्यम से अपने खाते में ट्रांसफर करा लिया गया।

पांडुल कुजूर पिता केवटा के मामले में हितग्राही से पांच बार अंगूठा लगवाकर 10,000 रुपए के हिसाब से कुल 50,000 रुपए लिए जाने की बात सामने आई है।

पुलिस कार्रवाई:
शंकरगढ़ पुलिस द्वारा मामले में विधिवत अपराध दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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