
जिला अस्पताल में आपातकालीन वार्ड से उठे सवाल, व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न
बलरामपुर/(शोएब सिद्दिकी) जिला अस्पताल बलरामपुर में बीती मंगलवार रात लगभग 10:00 बजे आपातकालीन वार्ड में कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद नर्स और डॉक्टर ने मरीज व उसके परिजनों के साथ अभद्र व्यवहार किया।

मौके पर मौजूद जामवंतपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मो. फैजुद्दीन ने बताया कि उन्होंने उपस्थित डॉक्टर से मरीज का शीघ्र उपचार करने की अपील की। इस पर कथित रूप से स्टाफ की ओर से जवाब मिला— “यह सरकारी अस्पताल है, हम दौड़ने नहीं लगेंगे। सरकारी जैसा ही इलाज होगा”
इस बयान के बाद परिजनों में नाराजगी फैल गई। फैजुद्दीन ने सवाल उठाया कि जब कर्मचारियों को उनके कार्य के लिए नियमित वेतन मिलता है और सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, तो फिर मरीजों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों?
क्या “सरकारी” शब्द का अर्थ लापरवाही और असंवेदनशीलता है?
क्या सरकारी अस्पतालों में बेहतर और मानवीय व्यवस्था संभव नहीं है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल आम और गरीब जनता की अंतिम उम्मीद होता है। ऐसे में आपातकालीन वार्ड में इस तरह की बातें पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती हैं।
हालांकि अस्पताल में कई कर्मचारी ऐसे भी हैं जो जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ अपनी ड्यूटी निभाते हैं,
लेकिन कुछ लोगों का रवैया पूरे संस्थान की छवि को प्रभावित कर देता है।
सवाल सिर्फ एक रात की घटना का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का है।
