
एक-दो रुपये के सिक्कों को लेकर बाजार में भ्रम, आम लोगों को हो रही परेशानी
बलरामपुर/(शोएब सिद्दिकी) छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में छोटे सिक्कों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जिले में एक और दो रुपये के सिक्कों को लेकर बाजार में ऐसा माहौल बन गया है मानो ये प्रचलन से बाहर हो चुके हों।
हालांकि हाल ही में कलेक्टर राजेंद्र कटारा द्वारा जनसंपर्क विभाग के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया था कि भारतीय मुद्रा को लेने से इनकार करना उचित नहीं है और सभी प्रकार के सिक्के वैध हैं।

इसके बावजूद कई दुकानों में सिक्के लेने से परहेज किया जा रहा है।
इस स्थिति का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से बाजार पहुंचे लोग जब छोटे सिक्कों के साथ खरीदारी करते हैं, तो कई बार उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। खुले पैसे न होने की स्थिति में दुकानदार राउंड फिगर में भुगतान लेने की बात करते हैं या फिर छुट्टे के बदले अन्य वस्तुएं देने की कोशिश करते हैं।
परिवहन सेवाओं में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। बस और ऑटो चालकों द्वारा किराए में छोटे सिक्कों की अनुपलब्धता का हवाला देकर थोड़ा अधिक किराया लेने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस समस्या के पीछे सबसे बड़ा कारण जागरूकता और विश्वास की कमी है। कई लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि सिक्के पूरी तरह से मान्य हैं, वहीं कुछ व्यापारियों में भी इन्हें लेकर संकोच बना हुआ है।
जानकारों का कहना है कि यदि बैंक और संबंधित संस्थाएं सिक्कों के लेन-देन को लेकर सक्रिय पहल करें और लोगों के बीच स्पष्ट संदेश पहुंचाया जाए, तो स्थिति में सुधार आ सकता है।
अंतरराज्यीय क्षेत्र होने के कारण बलरामपुर में बाहर से आने वाले लोग भी इस व्यवस्था को देखकर हैरानी जताते हैं। अन्य शहरों में सामान्य रूप से प्रचलित सिक्कों को यहां स्वीकार न किए जाने से भ्रम की स्थिति बन रही है।
फिलहाल जरूरत इस बात की है कि सिक्कों को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर किया जाए और बाजार में सामान्य लेन-देन को सुचारू बनाया जाए, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
