
“DFO आलोक बाजपेयी के नेतृत्व में संयुक्त टीम की सटीक कार्रवाई, तीन राज्यों में फैले नेटवर्क का खुलासा”
(बलरामपुर ब्यूरो रिपोर्ट आफताब आलम)
बलरामपुर/बलरामपुर जिले में वन विभाग ने एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई करते हुए अंतर्राज्यीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। वन मंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी के कुशल नेतृत्व और सटीक रणनीति के चलते यह सफलता हासिल हुई है, जिसने पूरे क्षेत्र में वन्यजीव तस्करों के नेटवर्क को झकझोर कर रख दिया है।

यह कार्रवाई माननीय वनमंत्री केदार कश्यप के निर्देशन एवं वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे संगठित वन अपराध नियंत्रण अभियान के तहत की गई।
ऑपरेशन “जमई मोड़”: ऐसे बिछाया गया जाल
दिनांक 2 अप्रैल 2026 को वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (मध्य क्षेत्र भोपाल), राज्य उड़नदस्ता दल रायपुर और वनमंडल बलरामपुर की संयुक्त टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि जमई क्षेत्र में वन्यजीव अवशेषों की तस्करी होने वाली है।
DFO आलोक बाजपेयी के निर्देश पर टीम ने तत्काल रणनीति बनाकर ग्राम जमई (थाना बसंतपुर) के जमई मोड़ पर घेराबंदी कर दी। दोपहर के समय एक संदिग्ध मोटरसाइकिल को रोककर जब तलाशी ली गई, तो बैग से तेन्दुए की खाल बरामद हुई।
सख्ती से पूछताछ में आरोपियों ने अपने पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया।
पूरे गिरोह का खुलासा, 9 तस्कर गिरफ्तार
प्रारंभिक गिरफ्तारी के बाद आरोपियों की निशानदेही पर अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। ये सभी आरोपी झारखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं, जिससे साफ होता है कि गिरोह अंतर्राज्यीय स्तर पर सक्रिय था।
गिरफ्तार आरोपियों के पास से कुल 2 नग तेन्दुए की खाल जब्त की गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी कीमत बताई जा रही है।
वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा, समय पर कार्रवाई से बची बड़ी क्षति
विशेषज्ञों के अनुसार, तेन्दुआ भारत के संरक्षित वन्यजीवों में शामिल है और इसकी खाल की तस्करी एक गंभीर अपराध है। समय रहते हुई इस कार्रवाई ने न सिर्फ एक बड़े अवैध नेटवर्क को तोड़ा है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण की दिशा में भी अहम कदम साबित हुई है।
कानून का कड़ा शिकंजा
आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
3 अप्रैल 2026 को सभी आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी वाड्रफनगर के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
वन विभाग ने प्रकरण क्रमांक 22289/09 दर्ज कर आगे की विवेचना शुरू कर दी है।
जांच जारी, बड़े नेटवर्क से जुड़े तार तलाशे जा रहे
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। फिलहाल आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और जल्द ही और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
नेतृत्व और टीमवर्क की मिसाल
इस पूरी कार्रवाई को वन मंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी के नेतृत्व, टीम की सतर्कता और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।
वन विभाग की इस बड़ी सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छत्तीसगढ़ में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ अब जीरो टॉलरेंस की नीति पर सख्ती से अमल किया जा रहा है।

