
बलरामपुर/(शोएब सिद्दिकी)केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026 एक बार फिर यह साबित करता है कि यह बजट आम जनता और पिछड़े राज्यों के हित में नहीं, बल्कि चुनिंदा राज्यों और कॉरपोरेट घरानों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। विपक्ष की दृष्टि से यह बजट पूरी तरह जनविरोधी, असंतुलित और क्षेत्रीय भेदभाव से भरा हुआ है।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बलरामपुर अध्यक्ष समीर सिंह देव ने कहा कि महंगाई से त्रस्त मध्यम वर्ग और गरीब तबके को इस बजट में कोई ठोस राहत नहीं दी गई। आयकर में कोई बड़ी छूट नहीं, बेरोज़गारी और गिरती क्रय शक्ति को लेकर भी सरकार का कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया। यह बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल है, ज़मीन की सच्चाई से कोसों दूर।
उन्होंने कहा कि देश को कोयला, बिजली, स्टील और खनिज संपदा देने वाला छत्तीसगढ़ इस बजट में एक बार फिर उपेक्षित रहा। न कोई बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, न आदिवासी बहुल क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज, न किसानों और ग्रामीण विकास के लिए नई योजना, न ही रेल, उद्योग या उच्च शिक्षा संस्थानों की कोई घोषणा की गई। यह संघीय ढांचे के साथ सीधा अन्याय है।
समीर सिंह देव ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ एक प्रमुख आदिवासी राज्य होने के बावजूद बजट में आदिवासी और वन क्षेत्रों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। न PESA कानून को मज़बूती मिली, न वन अधिकार अधिनियम के लिए अतिरिक्त प्रावधान, न आदिवासी युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा की ठोस योजना।
उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ के संसाधनों से देश चलता है, लेकिन राज्य को उसका उचित हक नहीं मिलता। रॉयल्टी बढ़ाने की कोई घोषणा नहीं हुई, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार की गारंटी नहीं दी गई। मुनाफा कॉरपोरेट का और नुकसान राज्य का हो रहा है। यह बजट “Resource Colony Model” को और मजबूत करता है।
अंत में उन्होंने कहा कि बजट 2026 अमीरों के लिए उदार, आम जनता के लिए बेरुखा और छत्तीसगढ़ के लिए पूरी तरह निराशाजनक है। अब समय आ गया है कि छत्तीसगढ़ अपनी आवाज़ मजबूती से उठाए और इस अन्यायपूर्ण बजट का लोकतांत्रिक विरोध करे। छत्तीसगढ़ सिर्फ संसाधन देने वाला राज्य नहीं, बराबरी का हकदार है।


