
बलरामपुर/(शोएब सिद्दिकी)जिला अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों को अब बीमारी से ज्यादा दवाओं की कमी परेशान कर रही है। हालात ऐसे हैं कि डॉक्टर द्वारा पर्ची में लिखी गई 5 दवाओं में से मरीजों को सिर्फ 1 या 2 दवाएं ही मिल पा रही हैं। बाकी दवाओं के लिए मरीजों को बाहर की मेडिकल दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल में कई अच्छे ब्रांड की दवाएं आती तो हैं, लेकिन वे स्टोर तक नहीं पहुंच पातीं। सवाल यह उठता है कि आखिर वे दवाएं कहां जा रही हैं?

इतना ही नहीं, जिन दवाओं की मरीजों को सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है, वही दवाएं अक्सर स्टॉक में नहीं मिलतीं। अस्पताल के स्टोर में अधिकतर केवल दर्द और बुखार की सामान्य दवाएं ही उपलब्ध रहती हैं।
❓ क्या सिर्फ औपचारिकता निभा रहा है स्वास्थ्य विभाग?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दवा वितरण की व्यवस्था केवल कागजों में पूरी की जा रही है। अगर दवाओं की आपूर्ति नियमित है, तो मरीजों को पूरी दवा क्यों नहीं मिल पा रही?
यह भी बड़ा सवाल है कि
दवाओं की मांग और आपूर्ति का रिकॉर्ड क्या कहता है?
क्या इस पूरे मामले की जांच होगी?
जिला अस्पताल में दवा की कमी न सिर्फ गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ डाल रही है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रही है।
